राजधानी में सटोरियों और पुलिस का लुकाछिपी का खेल चलते ही रहता है। दो-चार महीने शांत रहने के बाद फिर सक्रिय हो जाना आदत में शुमार है। पुलिस जितने में पकडऩे के जाल बिछा ले सटोरिए आसानी से जाल को तार-तार कर देते है। कालीबाड़ी क्षेत्र के लोगों का सुबह-शाम ओपन-क्लोज, पत्ती नंबर के शोर शराबे से जीना मुहाल हो गया है। सैकड़ों शिकायत करने के बाद भी पुलिस रवि साहू के गुर्गों का पकडऩे में पीछे हट रही है।
सूत्र बताते है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान रवि साहू ने नेताओं से संपर्क बनाए और नेताओं का विस्वास जीता । जिसके परिणाम स्वरूप नेताओं ने चुनाव दौरान शराब और पैसा बांटने की जिम्मेदारी रवि साहू को सौंप दी। रवि साहू ने मंदी के दौर में नेताओं के तिराग रगडऩे के बाद जिन्न की तरह आका के सामने हाजिर हो गया। चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा दारू रवि साहू ने बांट कर बाजी पलटने में सहायक साबित हुआ। जिसके कारण रवि साहू नेताओं का मुहंलगा हो गया। जिसके संपर्क को देखकर पुलिस भी हैरान परेशान नजर आ रही है। शौर्य पेट्रोल पंप के सामने नाले के के पीछे बस्ती से लेकर सिद्धार्थ चौक, भाटागांव रोड, बूढ़ा पारा के आसपास के क्षेत्र,मारवाड़ी श्माशान घाट के आसपास की बस्ती, पुजारी पार्क, टिकरापारा क्षेत्र मेंं रविसाहू का खुला खेल फर्रूखाबादी चल रहा है। बड़े-बड़े नेताओं के साथ संपर्क बताकर उनके नाम से पुलिस को भी चकमा दे रहा है । काली बाड़ी के रहवासियों ने कलेक्टर, एसपी को लिखित में शिकायत की है कि क्षेत्र में सट्टा चलने के कारण आए दिन लड़ाई झगड़ा गैंगवार की स्थिति निर्मित हो जाती है। जिससे मोहल्ले वालों का जीना मुहाल हो गया है। उसके बाद भी पुलिस के कोई ठोस कदम नहीं उठाने का मामला लोगों के समझ में नहीं आ रहा है।
रविसाहू के गुर्गे सक्रिय : सूत्र बताते है कि रवि साहू ने नेताओं के नाम फायदा उठाकर लंबा चौड़ा कारोबार फैला रखा है। बड़े-बड़े दांव की काईवाली कर रहा है। गोलबाजार बंजारी मंदिर में एक परमानेंट ठिहा रविसाहू ने बना रखा है, जहां छोड़े-बड़े सटोरिए जुटते है। और बड़े-बड़े दांव और पुलिस से सेटिंग के रास्ते निकालने के पैंतरे निकालते है। काली बाड़ी में तो रवि साहू का एकतरफा सट्टा दौड़ रहा है। थाना प्रभारी से लेकर पुलिस के बड़े अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान होने के बाद भी रवि के राजनीति संरक्षक में बड़े नेताआं के हाथ होने से पुलिस हाथ खींच रही है। जिसके कारण रवि साहू को कारोबार दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ते जा रहा है।
मोहल्ले वाले हलाकान : कालीबाड़ी क्षेत्र में रहने वाले रहवासियों की मानें तो यहां रवि साहू के गुर्गों ने कारोबार संभाल रखा है, चुनाव के दौरान ही यहीं लोग घर-घर जाकर दारू और पैसा बांटते रहे है। अब यहीं लोग मोहल्ले के चौक में बैठकर सट्टा पट्टी लिख रहे है। मोहल्ले के लड़के सौ रूपए और खाने के चक्कर में अपना पैतृक काम छोड़ कर रवि साहू के गुर्गों के साथ मिलकर सट्टा लिखने का काम कर रहे है। आवारा लड़कों की धमा चौकड़ी के मोहल्ले वाले परेशान है। मोहल्ले वालों को कहना है कि यदि अब कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे और आंदोलन चलाएंगे।
बंजारी चौक में सट्टा और नशा का कारोबार : बंजारी वाले दरगाह के पास शास्त्री मार्केट और डीकेएस की ओर जाने वाले मार्ग में खंडहर नुमा मकान के पास आटो में बैठकर खुलेआम गांजा-अफीम और नशीले पदार्थ का कारोबार खुलेआम खुद रवि साहू और उसके गुर्गे करते है। जहां पुलिस सब कुछ देखने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रही है।
अभियान ठंडे बस्ते में:राजधानी में एसएसपी आरिफ शेख के पदस्थ होने के बाद लगातार अवैध कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया था, आईपीएल सट्टा में सक्रिय सटोरियों पर नकेल कसने के बाद सटोरिए भूमिगत हो गए थे। आचार संहिता के दौरान कानून व्यवस्था तगड़ी होने से सटोरियों की दाल नहीं गली, अब चुनाव समाप्त हो होते ही सटोरियों ने बेखौफ होकर खाईवाली शुरू कर दी है। समता कालोनी के सट्टा किंग चुप बैठे है, लेकिन अब राजधानी में एक नया नाम सट्टा सरगना के रूप में रवि साहू का सामने आ रहा है। अभियान ठंडे बस्ते में जाते ही सटोरियों का कारोबार फिर बेखौफ शुरू हो गया है
पैसे से चलता है धंधा
रवि साहू के गुर्गे खुलेआम चैलेंज करते है कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता हम सीधे आधे पैसे पुलिस और नेताओं के देते है। जितने दिन सट्टा बंद रखने के कहते उतने दिन बंद रखते फिर शुरू कर देते है। पुलिस और नेताओं से सेटिंग करने के लिए रविसाहू के लिए बड़े -बड़े अधिकारी लाइजनिंग करते है। इसलिए सट्टा के साथ गांजा-अफीम और नशीले पदार्थ का कारोबार को बेखौफ संचालित करते है। रवि साहू के खास गुर्गे ने बताया कि हमारा खेल पैसों से चलता है। दादा बड़ा न भैया सबसे बड़ा रूपैया वाला गेम है। रवि साहू पुलिस और नेताओं बराबर हर महीने पेटी पहुंचाता है। जिसके कारण पुलिस हाथ डालने से पहले सौ बार सोचती है। पुलिस के छोटे से बड़े अधिकारी और छुटभैया नेता से लेकर मंत्री स्तर तक पैसा पहुंचाने की बात रवि के गुर्गे खुलेआम करते है। रवि के गुर्गों का कहना है कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हम तो नेता और पुलिस के इशारे पर ही कारोबार कर रहे है। जब सट्टा बंद करने को कहते हौ कर देते देते है और जब चालू करने को कहती चालू कर देते है। हमारा रिमोट तो नेता और पुलिस के हाथों में है। हमें तो रोज लाखों छापना है। सट्टा से मिले या गांजा-अफीम या नशीली दवा से हमें कोर्ई फर्क नहीं पड़ता। पैसा आना चाहिए धंधा चलते रहना चाहिए।
इस तरह के काले कारोबार से राजधानी में पदस्थ ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों की छवि खराब हो रही है। पुलिस की नाकामियों को उजागर करने के पीछे हमारा मकसद पुलिस की कार्यशैली की आलोचना करना नहीं, बल्कि सजग करना है।
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