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नई व्यवस्था / कोरोना का सैंपल लेते ही हाथ में लगेगी क्वारेंटाइन की सील

राजधानी में कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ रही तादाद ने हेल्थ विभाग को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। हाल ही में कोरोना पॉजिटिव में बहुत से ऐसे मामले सामने आए, जब कोरोना जांच आए बिना कई लोग बाजारों यहां तक सरकारी दफ्तरों में भी घूमते फिरते रहे। इससे संक्रमण ने और भी लोगों को चपेट में ले लिया।
लिहाजा अब हेल्थ विभाग जांच के बाद होम क्वारेंटाइन सील लगाने की शुरुआत करने वाला है। ताकि लोग खुद ही ऐसे लोगों से सचेत रह सकें। वहीं क्वारेंटाइन सील हाथ में होने के कारण संबंधित व्यक्ति भी इधर-उधर जाने से एक मनोवैज्ञानिक दबाव के तहत खुद भी बचेगा। हाल ही में डॉक्टर अंबेडकर में कोरोना जांच के लिए जाने वाले लोगों को टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने तक अस्पताल में ही रोककर रखा जा रहा है। लेकिन जिला अस्पताल या बाकी जगहों पर ये सिस्टम नहीं बन पा रहा है। इसलिए भी इस तरह की व्यवस्था बन रही है। प्रदेश में अब तक करीब सवा दो लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है। इनमें से करीब 1.8 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट ही पॉजिटिव आई है। यानी करीब 98.2 प्रतिशत लोग जांच में निगेटिव पाए गए हैं। कोरोना जांच करवाने के बाद टेस्ट रिपोर्ट में आने में औसतन 6 दिन का वक्त लग जाता है। जिस व्यक्ति की जांच की जाती है, उसे हॉर्ड कॉपी में बाकी लैब रिपोर्ट की तरह कोई जांच रिपोर्ट नहीं दी जाती है। उसको एसएमएस भेजकर सूचित किया जाता है। ऐसे में 30 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को तय समय पर जांच की रिपोर्ट के बारे में पता ही नहीं चल पाता है। भास्कर ने कुछ कोरोना पीडितों के परिवारों से बातचीत की, उनमें से ज्यादातर ने बताया कि परिवार के सदस्य निगेटिव हैं इस बारे में एक साथ सूचना नहीं मिली। कुछ एक सदस्यों की रिपोर्ट निगेटिव मिलने के बाद बाकी सदस्यों की रिपोर्ट के लिए खुद से फोन भी करना पड़ा।
"जांच के बाद लोग भी इधर-उधर ना घूमें, इसके लिए हाथ में होम क्वारेंटाइन की सील लगाने का सिस्टम भी बना रहे हैं।"

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